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कश्मीर कहां खो गया

अकुुर महाजन

आज महाशिवरात्रि है। विशेष संस्करण आज शिव की भूमि,कश्मीर से है!
अमरनाथ मंदिर, शंकराचार्य मंदिर और कश्मीर में कई अन्य प्राचीन शिव मंदिरों को फूलों, रोशनी और बहुत प्यार से सजाया गया है। इस सब के बीच, जम्मू और कश्मीर के मूल निवासी ,कवि भावनात्मक उछाल में रहते हैं। वह घाटी में विभिन्न धर्मों के बीच खोई हुई खोह और आपसी सौहार्द को याद करता है। 
वह जम्मू और कश्मीर के सपने देखता है जो आपसी प्रेम, सम्मान और सद्भाव के लिए खड़ा है। वह पाकिस्तान की निंदा करता है जिसने कश्मीर को नष्ट करने के लिए कट्टरपंथी इस्लाम की गंदी राजनीति की।

Ankur Mahajan

Today is Mahashivratri. The special edition today is from Shiva's land, Kashmir !
The Amarnath Temple and Shankracharya temple alongwith many other ancient Shiva temples in kashmir are decorated with flowers, lights and lot of love. Amidst all this, the poet who is a native of Jammu & Kashmir dwells into emotional surge. He recalls the lost bonhomie and mutual harmony between different religions in the valley. He dreams of the Jammu and Kashmir that stands for mutual love, respect and harmony.  He condemns Pakistan  who  played dirty politics of radicalized Islam to destroy Kashmir.

 

आओ सुनाऊँ तुम्हें एक कहानी कश्मीर की,


हस्ते खेलते, नाचते गाते, झूमते काशिर की ।





कश्मीर जहाँ निशात में प्यार के गुल खिला करते थे,


वो कश्मीर जहाँ डल में शिकारों पे दिल मिला करते थे,


कश्मीर जहाँ शालिमार को श्रीनगर का ताज कहा जाता था,


वो कश्मीर जहां लाल चौक में सिनेमा दिखाया जाता था ।


कश्मीर जहां लबों पे दूरदर्शन के गीत गुनगुनाएँ जाते थे,


वो कश्मीर जहां खीर भवानी में मेले मनायें जाते थे,


कश्मीर जहां शिवरात्रि पे सभी पड़ोसी दावत पे बुलाए जाते थे,


वो कश्मीर जहाँ ईद पे गले मिलकर मीठे पकवान खिलाए जाते थे,


कश्मीर जिसके दृश्य हिंदी फिल्मो में दिखाए जाते थे,


वो कश्मीर जहां पर्यटन के उत्सव मनाए जाते थे,


ना जाने मेरा वो कश्मीर कहां खो गया,


ना जाने वो साहिर कहाँ सो गया ।



ना जाने कैसे ये अंधेरे बादल छा गए,


ना जाने क्यूँ ये आतंकी कश्मीर आ गए,


ना जाने क्यूँ हमने इन्हें अपना बना लिया,


ना जाने क्यूँ हमने इनकी भाषा को अपना लिया,


कोई बताए मुझे क्यूँ हमने अपनो को यूँही गवा दिया,


क्यूँ हमने अपने कश्मीर में इन भेदियों को पनाह दिया,


कोई बताए मूझे कि मेरा वो कश्मीर कहां खो गया,


मेरा वो कशीर कहां खो गया ।

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